Saturday, 7 January 2012

चालीस चौरासी का जोरदार प्रोमोशन


आप सभी को आपके अपने रवि किशन का प्रणाम. पिछले रविवार को मैं हिमालय की सर्द वादियों से आपसे अपने मन की बात बयान किया था , अब छुट्टी समाप्त हो गयी है और फिर से अपने रूटीन में लग गया हूँ . फिलहाल दो दिनों तक दिल्ली में बिताने के बाद कल मुंबई आया हूँ और अभी इंदौर जा रहा हूँ. १३ जनवरी को रिलीज़ हो रही फिल्म चालीस चौरासी के प्रोमोशन के लिए . मेरे साथ नसीर साहब , फिल्म के निर्देशक ह्रदय शेट्टी भी हैं. मेरे बीस साल के फ़िल्मी कैरियर में ऐसा पहली बार हुआ है जब लगातार आठ दिनों तक किसी फिल्म के प्रोमोशन में रहने और अपने दर्शको से सीधा संवाद करने का मौका मिला है . वैसे भोजपुरी फिल्मो के प्रोमोशन के लिए अक्सर पटना और बनारस जाने का मौका मिलता रहता है लेकिन वो प्रोमोशन एक से दो दिन का होता है . खैर इस बारे में आगे आपसे चर्चा करूँगा फिलहाल अपने परिवार के साथ बिताये पल आप से ज़रूर बांटना चाहूँगा . पिछले सप्ताह मैंने इस अद्भुत पल का जिक्र किया था , दरअसल काम में व्यस्तता के कारण परिवार को समय देना थोडा मुश्किल हो जाता है , लगातार मुंबई से बाहर शूटिंग करने के कारण इतना समय नहीं मिलता है की अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुल समय बीता सकूँ , उनकी भावनाओ को जान सकूँ . इसीलिए साल के आखिरी कुछ दिनों को मैंने खुद को अपने परिवार के हवाले कर दिया और छुट्टी बिताने के लिए जगह चुना शिमला, मनाली जैसे बर्फीली वादियों को . कडाके के ठंढ के बीच पांच दिन का ये वक़्त कैसे बीत गया , पता ही नहीं चला .बुधवार को हमें वापस लौटना था , लम्बे सड़क मार्ग से सफ़र तय कर चंडीगढ़ पंहुचा तो कोहरे के कारण हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था, यहाँ पहुच कर पता चला की की कोई भी जहाज मुंबई के लिए नहीं जा पायेगी क्योंकि कोहरे के कारण कुछ भी दिख नहीं रहा था , मुझे मुंबई वापस आकर अगले दिन दिल्ली आना था चालीस चौरासी के प्रोमोशन के लिए . खैर मुंबई आने का इरादा त्याग कर सड़क मार्ग से दिल्ली आया . सफ़र बहुत उबाऊ था क्योंकि गाडी चल नहीं रेंग रही थी . मैंने भी अपने ड्राइवर को कहा की कोई जल्दी नहीं है . गुरूवार और शुक्रवार को दिन भर कई ठिकानो पर आम दर्शको के मिलकर काफी सुखद एहसास हुआ , शुक्रवार को दिल्ली से वापस लौटने के बाद शनिवार को पूना गया , दोनों ही जगह आम दर्शको और मिडिया का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला , हम पूना से शाम वापस आ गए क्योंकि मुझे मुंबई पुलिस द्वारा हर साल आयोजित किये जाने वाले स्टार नाईट उमंग में मौजूद रहना था. आज चालीस चौरासी की पूरी टीम को पहले पटना फिर इंदौर जाना था लेकिन किसी कारण बस पटना का कार्यक्रम पांच दिनों के लिए ताल गया है. इन प्रोमोशन के दौरान हमने महसूस किया की हम सफलता के पथ पर आगे बढ़ते हैं और उन्हें ही समय नहीं देते जिन्होंने हमें इस काबिल बनाया . आप समझ ही गए होंगे की मैं आप लोगो की बात कर रहा हूँ जो हमें देखने के लिए टिकट निकाल कर सिनेमा हॉल में जाते हैं , मुंबई के हमारे दर्शक तो हम सभी सितारों को यदा कदा नज़र आ भी जाते हैं लेकिन दूर दराज़ के लोग इससे बंचित रह जाते हैं . भोजपुरी फिल्मो में तो जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की परंपरा नहीं रही है , लेकिन हिंदी फिल्म जगत वाले महानगरो में इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं , लेकिन मैं तारिफ करना चाहूँगा चालीस चौरासी के निर्देशक ह्रदय शेट्टी का जिन्होंने महानगरो के साथ साथ उन शहरो में भी फिल्म का प्रोमोशन करने का फैसला किया जहाँ कभी कभार ही फ़िल्मी कलाकार किसी फिल्म के प्रोमोशन के लिए जाते हैं . ह्रदय ने आठ दिन के प्रोमोशन में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इंदौर , पटना , पुणे , अहमदाबाद जैसे शहरों को चुना है .
. प्रोमोशन का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की गयी है , प्रोमोशन के आखिरी दिन मुंबई में गुरूवार को फिल्म का प्रीमियर है . मुझे ख़ुशी है की एक अच्छी फिल्म को हम आम लोगो तक सीधा पहुचाने की दिशा में सार्थक कदम उठा रहे हैं. इस प्रोमोशन का हिस्सा बनकर मुझे लगा की अगर भोजपुरी फिल्मो का प्रोमोशन भी कुछ इसी तरह हो तो निर्माता को काफी फायदा होता है . मैं इस दिशा में आगे बढ़ रहा हूँ और फरबरी में रिलीज़ हो रही अपनी भोजपुरी फिल्म कईसन पियवा के चरित्तर बा को ढंग से प्रमोट करूँगा . मैं भोजपुरी फिल्मो के निर्माता निर्देशकों से भी अपील करता हूँ की वो इस बारे में सोचे ताकि इसका फायदा फिल्म को हो. अंत में मैं आप लोगो से गुजारिश करूँगा की चालीस चौरासी अवश्य देखें , फिल्म देखकर आपको लगेगा की आपका पैसा वसूल हो गया है, क्योंकि इंटरटेनमेंट का भरपूर मसाला है इस फिल्म में . हम चारो की केमेस्ट्री काफी अच्छी है जिसे देखकर आप कह उठेंगे - बहुत ही प्यार से बनी है ये फिल्म . आप मेरा ये स्तम्भ आप हर रविवार मुंबई और पुणे से प्रकाशित लोकप्रिय हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी पढ़ सकते हैं अगले हफ्ते फिर मुलाकात होगी . तब तक के लिए आपसे विदा चाहता हूँ .
आपका अपना
रवि किशन

Saturday, 31 December 2011

अलविदा २०११, स्वागतम २०१२


आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . सबसे पहले आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं . साल के पहले दिन की शुरुवात रविवार यानी छुट्टी के दिन से हो रही है और मेरे लिए ख़ुशी की बात यह है की पहले दिन ही आपसे रूबरू हो रहा हूँ . अभी हिमालय की सर्द वादियों में अपने पूरे परिवार के साथ छुट्टी मना रहा हूँ , लम्बे अंतराल के बाद कुछ वक्त मिला था सोचा इसका सदुपयोग कर लिया जाये क्योंकि दो दिन बाद से एक बार फिर काम में जुट जाना है .फिर महीनों तक आराम का वक़्त नहीं मिलने वाला है . आज मेरे बड़े भाई सामान श्री आर.एन.सिंह जी का जन्मदिन भी है , मेरी तरफ से उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी बधाई ,
आज साल का पहला दिन है मतलब खुशियों का दिन लेकिन बीते साल की कुछ खट्टी मीठी यादें भी है . मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर बीता साल काफी अच्छा रहा है क्योंकि इस दौरान कई बड़ी फिल्मो की शूटिंग मैंने पूरी की . अंतिम शूटिंग मेरी थी साल के आखिरी सप्ताह में डेंजरस इश्क की जिसे बना रहे हैं विक्रम भट्ट और एक खासियत इस फिल्म की ये भी है की इस फिल्म से करिश्मा कपूर की वापसी हो रही है . फिल्म के बारे में ज्यादा चर्चा फिलहाल नहीं करूँगा बस इतना ही कहूँगा की एक अद्भुत प्रेम कहानी आपको इस फिल्म में मिलेगी मेरे और करिश्मा कपूर के बीच की . वैसे नए साल में मेरी कई फिल्मे आ रही है . लेकिन पहली फिल्म एक मजेदार फिल्म है जो मकर संक्रांति पर आ रही है , जिसकी आजकल काफी चर्चा है . आप समझ ही गए होंगे मैं चालीस चैरासी की बात कर रहा हूँ. इस फिल्म को निर्देशित किया है ह्रदय शेट्टी ने और मैं इस फिल्म में नसीर सर , के.के. मेनन और अतुल कुलकर्णी के साथ नजर आऊंगा . मैं अपने मूह से खुद इस फिल्म की तारिफ नहीं करूँगा वो मैं आप लोगो पर छोड़ देता हूँ लेकिन मैं नसीर सर की तारिफ अवश्य करूँगा क्योंकि वो अभिनय के अथाह सागर हैं नसीर सर अपने आप में एक संस्थान की तरह हैं. उनके पास अभिनय का दो दशकों से भी अधिक समय का अनुभव है और उनके इस अनुभव से मैंने काफी कुछ सीखा है. मैं पूरी तरह उनके प्रभाव में हूं, क्योंकि वो बहुत ही ईमानदार, भद्र और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं. उनके जीवन में पैसा मायने नहीं रखता. सच में मुझे उनके साथ काम करते बड़ा मजा आया. के.के और अतुल भी बहुत अच्छे अभिनेता है और हम चारो की जुगल बंदी आपको रोमांच से भर देगी . खैर , इस फिल्म की चर्चा आगे करूँगा फिलहाल इस का प्रोमोशन जम कर चल रहा है . सबसे दिलचस्प बात तो यह है की बरसो पहले जिस गाने ( हवा हवा अई हवा खुशबू लूटा दे ) की धूम मची थी उसका आनंद आप इस फिल्म में भी उठा सकते हैं .
बीते साल हमने कला क्षेत्र के कई विभूतियों को खोया है पंडित भीम सेन जोशी, भूपेन हजारिका , शम्मी कपूर , देव आनंद साहब जैसे कुछ ऐसे नाम हैं जिहोने भारतीय कला क्षेत्र को नया आयाम दिया . उन सभी को मेरी भावभीनी श्रधांजलि . अगले रविवार फिर आपसे मुलाकात होगी . आप मेरा ये स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी हर रविवार पढ़ सकते हैं .. आपका नया साल शुभ हो , आप लोगो की सारी मनोकामनाएं पूरी हो इसी आशा के साथ आपसे विदा चाहता हूँ .
आपका
रवि किशन

Sunday, 25 December 2011

जय भोजपुरी : जय भोजपुरिया



आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . सबसे पहले आप सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाये : आने वाला साल आप सभी के जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाये , यही प्रार्थना है मेरी भगवान से . बीता साल जो अब चंद दिनों का मेहमान है , को विदाई देते हुए हर किसी को अपना आकलन करना चाहिए की मैंने क्या खोया , क्या पाया, क्या पाया जा सकता था जो मैंने नहीं पाया आदि आदि. यानी बीता साल हर किसी के लिए महत्वपूर्ण होता है . मेरे लिए भी बीता साल काफी महत्वपूर्ण रहा है . सच कहूँ तो मेरे कैरियर के अच्छे साल में से एक है साल 2011 . बचपन में मेरी नन्ही आँखों ने एक सपना देखा था , की कुछ ऐसा करूँ की सारी दुनिया मुझे पहचाने , मुझे जाने और मेरे माता पिता , गुरुजनों को मुझपर गर्व हों और इसे पाने के लिए मेरे नज़र में तीन ही ऑप्शन थे क्रिकेट , राजनीति और फिल्म . मैंने खुद को टटोला तो पाया की अभिनय तो मेरे शरीर का एक हिस्सा है. फिल्मो का शौक था , फिल्म देखकर सोचता था मैं कब परदे पर आऊंगा ? मुंबई आया संघर्ष किया वो भी ऐसा संघर्ष जिसे करना आसान नहीं था . हमारे संघर्ष के दौर में मनोरंजन क्षेत्र में काम पाने के इतने माध्यम नहीं थे और मुझ जैसे बिना किसी गॉड फादर के यहाँ जगह बनाना मुश्किल था . मैंने हिम्मत नहीं हारी और मेरा साथ दिया मेरी भाषा भोजपुरी ने . आज मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है की आज हिंदी फिल्म जगत के बड़े बड़े निर्माता निर्देशक अगर मुझे अपनी फिल्मो में काम दे रहे हैं तो उसकी एक वजह भोजपुरी भी है . आप सोच रहे होंगे आखिर मैं अपनी संघर्ष गाथा क्यों बता रहा हूँ , दरअसल बीते साल में हिंदी फिल्म जगत ने मुझे काफी इज्ज़त प्रदान की . आप लोगो को पता ही है की मैं पिछले कई सप्ताह से हिंदी फिल्मो की शूटिंग में व्यस्त हूँ. सैफ अली खान की होम प्रोडक्शन एजेंट विनोद की शूटिंग के बाद जिला गाज़ियाबाद, फिर इसक और विक्रम भट्ट साहब की डेंजरस इश्क की शूटिंग में व्यस्त रहा . भोजपुरी की कई फिल्मे मेरे पास आई लेकिन व्यस्तता के कारण मैंने उसे आगे कर दिया . आप लोगो को लग रहा होगा की मैंने भोजपुरी फिल्मो से किनारा कर लिया है , लेकिन ऐसा है नहीं , मैं कभी भी भोजपुरी फिल्मो से अपना नाता नहीं तोड़ सकता , क्योंकि आपके प्यार ने ही आज मुझे हिंदी के बड़े बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका दिया है. एक ऐसी ही फिल्म है चालीस चौरासी जो मकर संक्रांति के अवसर पर १३ जनवरी को रिलीज़ हो रही है . इस फिल्म में आप अपने भोजपुरिया रवि किशन को बिल्कुल अलग अंदाज़ में देखेंगे . चालीस चौरासी को निर्देशित किया है मेरे दोस्त ह्रदय शेट्टी ने . फिल्म में नसीरुद्दीन सर , के.के.मेनन और अतुल कुलकर्णी मेरे साथ हैं. ह्रदय जी ने एक अच्छी फिल्म बनायीं है , मुझे पूरा भरोसा है की आपलोगों को ये फिल्म अवश्य पसंद आएगी . नए साल की शुरुवात फिर से भोजपुरी फिल्मो की शूटिंग से कर रहा हूँ . लगभग आधा दर्ज़न फिल्मो की शूटिंग अगले चार महीनो में मुझे पूरी करनी है . खैर , नए साल के पहले दिन यानी अगले सप्ताह मैं जब आप मेरा स्तम्भ पढ़ रहे होंगे तब मैं शिमला और मनाली की ठंढी का आनंद ले रहा होऊंगा , काफी समय से परिवार से थोडा कटा रहा हूँ इसीलिए पत्नी और बच्चों के साथ छुट्टी मनाने जा रहा हूँ . परिवार का साथ हो तो काम का बोझ समाप्त हो जाता है . अगले सप्ताह फिर आपसे मुलाकात होगी . आप मेरा ये स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी हर रवि वार पढ़ सकते हैं . नए साल के पहले दिन आपसे फिर बात होगी
आपका रवि किशन

Saturday, 3 December 2011

भोजपुरिया माटी के लाल राजेन्द्र बाबु


आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . फिलहाल जोधपुर की ठंढी के बीच विक्रम भट्ट साहब की फिल्म डेंजरस इश्क की शूटिंग में व्यस्त हूँ और यही से अपने दिल की बात आपसे बयान कर रहा हूँ.आज का दिन ना सिर्फ देश के लिए बल्कि हम भोजपुरी फिल्म जगत वालों के लिए भी ख़ास है क्योंकि इस दिन देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती है . बिहार के सिवान के जीरादेई गाँव में एक मध्यम वर्ग के परिवार में जन्म लेने वाले राजेंद्र बाबु मेरी नज़र में भोजपुरी क्षेत्र के सबसे प्रकांड विद्वान् थे . मैंने पढ़ा था बचपन में उनके बारे में की कोलकाता के जिस प्रेसिडेंसी कोलेज में वो पढ़ते थे वहाँ के शिक्षक भी उन्हें खुद से ज्यादा काबिल समझते थे . सादा जीवन उच्च विचार के प्रतिमूर्ति राजेंद्र बाबू के बारे में उनकी परीक्षा पुस्तिका की जांच करने वाले शिक्षक ने लिखा था की छात्र शिक्षक से कहीं जायदा जानकार है. यहाँ इस बात का जिक्र करने का मेरा मकसद यह है की हमारी धरती ने एक से बढ़कर एक माटी के लाल को जन्म दिया है जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में अपने कार्यों से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. बात राजेन्द्र बाबु की कर रहा हूँ तो शायद कम लोगो को ही पता होगा की जिस भोजपुरी फिल्म जगत में लाखो लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम कर अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं इसकी शुरुवात राजेन्द्र बाबु ने ही करवाई थी. राजेन्द्र बाबु का भोजपुरी भाषा के प्रति प्रेम जग जाहिर है . उस दौर में भोजपुरी फिल्मे बनती नहीं थी . भोजपुरी फिल्मो के पहली फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ थी और इस फिल्म की कहानी तैयार की थी भोजपुरी फिल्मो के भीष्म पितामह कहे जाने वाले नाजीर हुसैन साहब ने. नाजिर साहब भोजपुरी भाषा में फिल्म बनाने को आतुर थे और उन्हें इसकी प्रेरणा मिली थी राजेंद्र बाबु से . राजेंद्र बाबु ने उस समय उन्हें कहा था की अगर संयम और हिम्मत है तो आगे बढ़ो हम आपके साथ है. सबसे दिलचस्प बात तो ये है की इस फिल्म के निर्माण का बीड़ा उठाने वाले विश्व नाथ प्रसाद शाहाबादी को नाजीर हुसैन से मिलवाया भी था राजेंद्र बाबु ने ही . १६ फरवरी १९६१ को खुद राजेन्द्र बाबु ने ही पहली फिल्म का मुहूर्त पटना के शहीद स्मारक के पास किया था. अब आप लोगो को पता चल ही गया होगा की आज जिस फिल्म जगत की बदौलत हम अपना नाम रोशन कर रहे हैं वो राजेंद्र बाबु की ही देन है. आज भले ही फिल्म जगत में इसकी कोई चर्चा नहीं होती हो लेकिन हमें भोजपुरिया माटी के लाल राजेंद्र बाबु के इस देन पर गौरवान्वित होना चाहिए . चलते चलते मैं आपसे पिछले दिनों की एक अद्भुत संस्मरण से आपको अवगत कराना चाहता हूँ. मेरी बड़ी चाहत थी की मैं अजमेर शरीफ जाकर ख्वाजा के दरबार में चादर चढाऊं , भले ही मैं ब्रह्मण का बेटा हूँ और महादेव का भक्त लेकिन मेरी आस्था सभी धर्मो में है क्योंकि सभी धर्म प्यार और भाईचारा सिखाता है. जोधपुर में शूटिंग करने के कारण वहाँ जाने की मेरी इच्छा पूरी हो गयी . मैंने चादर चढ़ा कर कई घंटे वहाँ बिताये , काफी सुकून महसूस किया. मुझे कुछ वैसी ही अनुभूति मिली जैसा की किसी मंदिर में जाकर मिलती है. मैं ब्राह्मण का बेटा हूँ, महादेव का परम भक्त हूँ लेकिन सभी धर्मो में मेरी अपार श्रधा और आस्था है क्योंकि सभी धर्मो का सार है प्यार और भाई चारा और वैसे भी मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना . चलते चलते मैं मुंबई के अपने मिडिया से जुड़े भाई बहनों से माफ़ी चाहता हूँ की मैं अपनी फिल्म चालीस चौरासी के फर्स्ट लुक के मौके पर उनके समक्ष मौजूद नहीं था. आप मेरा ये ब्लॉग मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर के रविवार के विशेषांक में भी पढ़ सकते हैं. अगले सप्ताह फिर मुलाकात होगी
आपका
रवि किशन

Friday, 25 November 2011

महादेव ने बचाई जान ...


आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . भगवान शिव का लाख लाख शुक्र है की आज मैं आपसे अपने दिल की बात शेयर कर रहा हूँ. वरना ये भी हो सकता था की आप लोगो से रिश्ता तोड़ शायद मैं यहाँ नहीं रहता . अभी फिलहाल मैं जोधपुर में विक्रम भट्ट साहब की फिल्म डेंजरस इश्क की शूटिंग कर रहा हूँ और आज ही बिहार में मेरी फिल्म हमार देवदास ( देवदास का भोजपुरिया रूप ) रिलीज हुई है . इन फिल्मो के बारे में थोड़ी चर्चा बाद में करूँगा पहले उस हादसे को आपसे बाटना चाहता हूँ जिसे मैंने पिछले शनिवार को बनारस में झेला था. पिछले शनिवार की रात मैं बनारस में हिंदी फिल्म इसक की शूटिंग में व्यस्त हो गया था. निर्माता शैलेश सिंह की इस फिल्म का निर्देशन मनीष तिवारी कर रहे हैं . कई दिनों से वहाँ रात में ही शूटिंग चल रही थी . हादसे वाली रात बनारस के घाट के पास ब्रिज पर शूटिंग चल रही थी. भोर के चार बजे उस रात का दृश्य अपनी चरम पर था . दृश्य के मुताबिक मैं अपनी गाडी से आता हूँ , सामने से एक ट्रक मेरा रास्ता रोकता है. दृश्य शुरू हुआ और अचानक तेज गति में आ रही ट्रक का ब्रेक फेल हो गया, जिससे ट्रक सीधा मेरी गाडी से आ टकराया . मेरी सोचने समझने की शक्ति तो उसी वक्त ख़तम हो गयी थी जब मुझे आभास हो गया था की ट्रक टकराने वाली है , लेकिन किसी अदृश्य शक्ति, जो निसंदेह मेरे अराध्य देव महादेव की थी के कारण मुझे यकायक चेतना आई और मैंने छलांग लगा दी, हालंकि थोड़ी देर हो चुकी थी लेकिन फिर भी पैरों में काफी चोट लगने के वावजूद मैंने खुद को सही सलामत पाया . मेरी गाडी की हालत देखकर मुझे लगा की पल भर की देरी मेरे लिए घातक साबित हो सकती थी. मैंने सबसे पहले अपने महादेव का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उस कठिन पल में मेरे सोचने समझने की शक्ति मुझे वापस कर दी. मेरे दिन की शुरुवात हर हर महादेव से ही होती है और आपने महुआ चैनल का मेरा कोई भी शो देखा होगा तो उसमे मैंने उन्हें याद किया ही है. मेरा सही सलामत होना उनके प्रति मेरी भक्ति और आस्था का ही परिणाम है. इंसान को भगवान पर आस्था रखनी ही चाहिए ,क्योंकि भगवान में आस्था से सारे दुःख दर्द दूर हो जाते हैं , आपको लग रहा होगा की मेरी आस्था ने अंधविश्वास का रूप ले लिया है , अगर ऐसा है तो आप गलत सोच रहे हैं क्योंकि इसे सिर्फ हम ही नहीं वैज्ञानिक भी मानते हैं. वो अब मानते हैं की ईश्वर में आस्था रखने वाले लोग सकारात्मक रवैया अपनाकर दर्द को कम कर सकते हैं , आप सोच रहे होंगे की क्या ये सच है ? तो आपको बता दूं की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी की एक टीम ने ईश्वर की आस्था की परखने के लिए बरसो पहले एक टेस्ट किया था. टीम ने 12 आस्तिक और 12 नास्तिकों को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया. इस दौरान ये लोग वर्जिन मैरी और लियोनार्दो द विंची की श्लेडी विद एन अर्माइनश् पेंटिंग्स को देख रहे थे. इन लोगों को आधे घंटे तक एमआरआई स्कैनर में रखा गया, उन्हें चार सेशनों में 20 झटके दिए गए. जब वे पेंटिंग की ओर देखते थे, तो उन्हें होने वाले दर्द को माप लिया जाता था. वैज्ञानिकों ने देखा गया कि भगवान के प्रति आस्था रखने वालों को कम दर्द हुआ, ब्रेन स्कैनिंग से देखा गया कि उस दौरान आस्तिकों के दिमाग में दर्द सहन करने वाला हिस्सा ज्यादा ऐक्टिव हो जाता था, इसके उलट, नास्तिकों के दिमाग में दर्द को सहन करने से जुड़ी कोई ऐक्टिविटी नहीं दिखी . मैंने यहाँ इसीलिए इसका जिक्र किया क्योंकि मेरा खुद का मानना है की आस्था में बहुत बड़ी शक्ति छुपी होती है. खैर , मैं खुद को खुशनसीब मानता हूँ की भगवान महादेव ने मेरी जान बचा ली. उन्होंने ही हमें इस दुनिया में भेजा है और जब भी जाऊंगा उनकी ही मर्जी से जाऊँगा . चलते चलते मैं आपसे मेरी आज रिलीज़ हुई मेरी फिल्म हमार देवदास की थोड़ी चर्चा करना चाहता हूँ. निर्देशक किरण कान्त वर्मा ने कम बजट में देवदास जैसी कहानी को अच्छे अंदाज़ में भोजपुरी में पेश किया है. एक साफ़ सुथरी भोजपुरी फिल्म देवदास जल्द ही मुंबई के सिनेमा घरो में भी दस्तक देगी , आप मेरा यह स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित लोकप्रिय हिंदी दैनिक हमारा महानगर में हर रविवार पढ़ सकते हैं . आप अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव हमें अवश्य दें .
आपका अपना
रवि किशन

Saturday, 12 November 2011

ZILA GAZIABAAD


जिला गाजियाबाद
आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ला का प्रणाम. आज ही (शुक्रवार) बनारस से लौटा हूँ और मुंबई में अपने मित्र विनोद बच्चन की फिल्म जिला गाजियाबाद की शूटिंग कमलिस्तान स्टूडियो में कर रहा हूँ . जिला गाजियाबाद की चर्चा मैं बाद में करूँगा सबसे पहले देश की सांस्कृतिक राजधानी बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के देव दीपावली का जिक्र जरूर करना चाहूँगा. आप सभी को मैं कार्तिक पूर्णिमा की बधाई देता हूँ. हमारे जो भाई बनारस या उसके आस पास के होंगे उन्हें काशी की देव दीपावली की जानकारी होगी ही , लेकिन आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे जिन्हें शायद इनकी जानकारी ना हो , इसीलिए मैं आपसे अपना अनुभव शेयर करना चाहूँगा . बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी की बात ही निराली है . पूरा शहर मुझे भक्तिमय लगता है. दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा आता है और इस दिन का यहाँ के बच्चे , बूढ़े , जवान, माता बहनों को बेसब्री से इंतजार रहता है. एक तरफ तो वो इस पवित्र दिन गंगा मैया के चरणों में आकर पुण्य के भागीदारी बनते हैं तो दूसरी ओर देव दीपावली का नजारा देव लोक का आभास दिलाता है. आप लोगो को पता ही है की शरद ऋतु को भगवान श्रीकृष्ण की महा रासलीला का काल माना जाता है. शीमद भगवत गीता में इसका उल्लेख मिलता है और उसमे कहा गया है की शरद पूर्णिमा की चांदनी में श्रीकृष्ण का महारास सम्पन्न हुआ था. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर राक्षस त्रिपुरा सुर का वध किया था, परम्परा और आधुनिकता का अदभुत संगम देव दीपावली धर्म परायण महारानी अहिल्याबाई से भी जुड़ा है. अहिल्याबाई होल्कर ने प्रसिद्ध पंचगंगा घाट पर पत्थरों से बना खूबसूरत हजारा दीप स्तंभ स्थापित किया था जो इस परम्परा का साक्षी है. आधुनिक देव दीपावली की शुरुआत दो दशक पूर्व यहीं से हुई थी . देव दीपावली की तैयारी यहाँ के लोग साथ दिन पहले से ही शुरू कर देते हैं , घाटो को सजाया संवारा जाता है , शाम के समय गंगा के करीब 10 किलोमीटर में फैले अर्द्धचन्द्राकार घाटों तथा लहरों में जगमगाते, इठलाते बहते दीपो के कारण गंगा मैया की छटा अद्भुत लगती है . कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर काशी में होना मानो जैसे मेरे लिए भगवान से मिलने के सामान था . हजारो की भीड़ के साथ गंगा मैया की जय और हर हर महादेव का उदघोष एक भक्तिमय जोश का संचार करता है. मैं खुशनसीब हूँ जिसे ऐसा अवसर प्राप्त हुआ है. ऐसा लगता है जीवन सफल हो गया . खैर दो तीन दिन बाद मुझे फिर से बनारस जाना है जहाँ फिर से इसक की शूटिंग करनी है . जिला गाजियाबाद की शूटिंग के कारण मुझे मुंबई आना पड़ा . यहाँ संजय दत्त , अरसद वारसी, विवेक ओबेराय के साथ शूटिंग कर रहा हूँ. जिला गाजियाबाद में मेरा किरदार रासिद अली नाम के ड़ोंन का है. बहुत ही अच्छी फिल्म फिल्म बन रही है .संजू बाबा के साथ मैंने लक में काम किया था. मुझे पूरा भरोसा है की आपलोगों को फिल्म जरूर पसंद आएगी. कल ही मुंबई में मेरी भोजपुरी फिल्म फौलाद रिलीज हुई है . मुझे ख़ुशी है की पहली बार कोई भी भोजपुरी फिल्म मुंबई सर्किट में पैतीस सिनेमाघरों में लगी है और आपलोग उन्हें पसंद भी कर रहे हैं. छठ मैया के आशीर्वाद और आपके प्यार से पिछले सप्ताह रिलीज हुई मेरी दो भोजपुरी फिल्मे रिलीज हुई . उत्तर प्रदेश के मल्टीप्लेक्स में मेरी फिल्म केहू हमसे जीत ना पाई रिलीज हुई और लोगो ने काफी सराहा है . फिल्म वहां अच्छा व्यवसाय कर रही है . मैं निर्माता डॉ. करीम दंपत्ति व निर्देशक एम.आई.राज. को बधाई देता हूँ जिन्होंने देशभक्ति पर आधारित फिल्म बनाने का फैसला किया. मैं दुर्गा दादा को भी बधाई देता हूँ क्योंकि उनकी फिल्म पियवा बडा सतावेला बिहार में अच्छा व्यवसाय कर रही है.
आप मेरा यह ब्लॉग मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में हर रविवार पढ़ सकते हैं.
आपका अपना रवि किशन

Tuesday, 1 November 2011

एजेंट विनोद सैफ और मैं


सभी भोजपुरिया भाइयों - बहनों को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . पिछले दस साल में ये पहला मौक़ा है जब छठ के पावन अवसर पर भगवान सूर्या देव एवं छठी मैया की आराधना मुंबई में नहीं कर पाया . दरअसल मैं अभी जैसलमेर की रेगिस्तान की ख़ाक छान रहा हूँ. यहाँ मैं सैफ अली खान की होम प्रोडक्शन की फिल्म एजेंट विनोद की शूटिंग कर रहा हूँ . वहाँ ३१ अक्टूबर तक ही शूटिंग होनी थी लेकिन किसी कारण तीन दिन का अतिरिक्त समय लग गया, जिसके कारण मेरा आगे का पूरा कार्यक्रम बदल गया. आपलोगों को तो पता ही है की मैं हर साल जुहू बीच पर छठ के पावन अवसर पर जाता रहा हूँ , इस बार भी मुझे अपने मित्र संजय निरुपम जी और सुभाष पासी जी द्वारा आयोजित पूजा पंडाल में मौजूद रहकर आपलोगों से मिलना था. मैं आपलोगों से क्षमा चाहता हूँ. वैसे इंसान को दोस्तों का नुकसान नहीं करना चाहिए . मैंने आपको बताया की मैं सैफ अली खान की फिल्म कर रहा हूँ . सैफ अली खान को आखिर मुझमे क्या दिखा की उन्होंने जब अपने होम प्रोडक्शन की पहली फिल्म बनाने की सोची तो मुझे भी इसमें काम करने का आमंत्रण भेजा ? मेरे अधिकतर जानने वालो को भी पता नहीं होगा की मैंने सैफ अली खान के साथ बरसो पहले भी एक फिल्म की थी . फिल्म का नाम था कीमत जो १९९८ में रिलीज़ हुई यही इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे अक्षय कुमार , सैफ और रवीना टंडन , जबकि मैं भी मोहन त्रिपाठी नाम के एक युवक की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका में था. सैफ से मेरी पहचान उसी फिल्म के दौरान हुई थी . नवाब पटौदी और शर्मीला टैगोर जैसी शख्सियत की संतान होने के वावजूद सैफ में कोई इगो नहीं था , अगर रहता तो उस दौर में जब मेरी पहचान एक संघर्षरत कलाकार की थी तक की पहचान को वो भूल जाते , लेकिन सैफ को पूरी बातें याद थी इसीलिए उन्होंने जब मुझे अपनी फिल्म के लिए आमंत्रित किया तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा . हाँ तो मैं आपको बता रहा था की मेरे शूटिंग का कार्यक्रम इनदिनों काफी व्यस्त है . एजेंट विनोद के कारण एक तरफ जहाँ मुझे विक्रम भट्ट की फिल्म डेंजरस इश्क की शूटिंग में नहीं पहुच पाया हूँ तो दूसरी तरफ बनारस में शैलेश सिंह की इसक की भी शूटिंग में भाग नहीं ले पा रहा हूँ. इन दोनों फिल्मो के बीच मुझे एक दिन की शूटिंग विनोद बच्चन की फिल्म जिला गाज़ियाबाद और एक दिन महुआ के शो नाच नचैया धूम मचैया की भी शूटिंग करनी थी. मैं कभी नहीं चाहता की मेरे कारण किसी का भी कोई नुकसान हो . जा सैफ को यह बात पता चली तो उन्होंने खुद मेरे निर्माता निर्देशकों से बात की. खैर मुझे ख़ुशी है की आज जैसलमेर के शूटिंग का आखिरी दिन है और कल यानी गुरूवार को मैं बनारस पहुच जाऊंगा . बनारस यानी बाबा विश्वनाथ की नगरी , जिस शहर को मैं बहुत पसंद करता हूँ.
आपलोगों ने इस रविवार महुआ टीवी के शो नाच नचैया धूम मचैया में मेरे भगवान यानी पंडित श्याम नारायण शुक्ल जी को देखा होगा ? जी हाँ मेरे भगवान यानी मेरे पिताजी , जिनकी बदौलत आज मैं यहाँ तक पंहुचा हूँ. मैंने कभी सोचा तक नहीं था की एक दिन किसी मंच पर कैमरे के सामने वो मेरे साथ होंगे . मैं उनके बारे में ज्यादा तो कुछ नहीं कहूँगा बस इतना ही कहना चाहूँगा की उनसे मुझे काफी उर्जा मिलती है . खैर चलते चलते एक बार फिर आप सबो को दीपावली और छठ पूजा की हार्दिक बधाई . आप मेरा ये स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी पढ़ सकते हैं .
आपका अपना
रवि किशन