Friday, 23 March 2012

जय माता दी

आप सभी को आपके अपने रवि किशन का प्रणाम . सबसे पहले आप सभी को नवरात्रि, नूतन वर्ष व गुडी पाडवा की हार्दिक बधाई . आज से ( शुक्रवार से ) चैत्र नवरात्र की शुरुवात हो चुकी है . हम सबके लिए ख़ुशी की बात है की इस साल हमें माँ दुर्गा की भक्ति भाव में डूबने के लिए एक अतिरिक्त दिन मिल रहा है. शुक्रवार से शुरू हुआ यह त्योहार रामनवमी यानी एक अप्रेल तक चलेगा . अर्थात यह दस दिन काफी पवित्र दिन है यह अवसर है नवसृजन के नवउत्साह का, जगत को प्रकृति के प्रेमपाश में बांधने का. पौराणिक मान्यताओं को समझने व धार्मिक उद्देश्यों को जानने का, यही है नवसंवत्सर, भारतीय संस्कृति का देदीप्यमान उत्सव, चैत्र नवरात्रि का आगमन, परम ब्रह्म द्वारा सृजित सृष्टि का जन्मदिवस का विशेष अवसर. जय माता दी - यह एक ऐसा मंत्र है जिसके जाप से सारे दुखों का निवारण होता है, माँ दुर्गा के नाम में वो शक्ति है जो हमारे शरीर में शक्ति ऊर्जा प्रदान करती है और माँ का ह्रदय तो इतना विशाल है की इसमें सारी श्रृष्टि समा सकती है. यही बात है की नवरात्र में हर लोग पवित्रता पालते हैं . हम सभी को पता है की ये दुनिया एक अदृश्य शक्ति से संचालित होती है और वो ही शक्ति हमारे अच्छे बुरे कामो पर नजर रखती है , इसीलिए जीवन में सदाचार अपनाना ही चाहिए अगर आपके कर्म अच्छे हैं तो कितनी भी बाधाएं क्यों नहीं आये आपको आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता . मैंने अपनी जिंदगी में अनेक उतार चढ़ाव देखे हैं. कभी कभी तो ऐसा भी हुआ है जब एक दो नहीं कई बाधाएं मेरी राह में पत्थर डाले नजर आये पर मैंने भगवान पर भरोसा किया और अपनी राह पर आगे बढ़ता गया . आज हालत ये है की मैं तो आगे बढ़ता गया और वो लोग काफी पीछे छुट गए , इतना पीछे की मैं चाह कर भी उन्हें नहीं देख सकता . खैर भगवान का लाख लाख शुक्र है की मैंने कभी अनजाने में भी किसी की राह में बाधा डालने की कोशिश नहीं की . आज मेरे लिए ख़ुशी का दिन है की मेरे पुराने दोस्त सैफ अली खान की फिल्म एजेंट विनोद रिलीज हुई है. उनकी आग्रह पर ही मैंने अतिथि भूमिका की है . गुरुवार को फिल्म का विशेष शो रखा गया था , मैं चूँकि पनवेल में दक्षिण भारत के एक बड़े निर्माता की बड़ी भोजपुरी फिल्म की शूटिंग कर रहा हूँ इसीलिए फिल्म देखने जा नहीं सका . मेरी बेटी रीवा फिल्म देखने गयी थी उसने और मिडिया के मेरे मित्रों ने मुझे फोन कर बताया की उन्हें मेरा छोटा काम बहुत पसंद आया . सैफ ने भी आपलोगों के भोजपुरिया हीरो यानी की मुझे सम्मान देते हुए परदे पर मेरा आभार व्यक्त किया है. फिल्म अच्छी बनी है और मेरी दिली तमन्ना है की आप लोग भी इस फिल्म को देखें . जिस तरह आप लोगो ने होली पर रिलीज हुई मेरी फिल्म कईसन पियवा के चरित्तर बा को प्यार दिया ऐसा ही प्यार इस फिल्म को भी दें. मुझे यह बताने में ख़ुशी हो रही है की कईसन पियवा की रफ्तार बढ़ चुकी है क्योंकि भारी तादात में महिलाएं इसे देखने आ रही है . भोजपुरी फिल्मो पर अक्सर आरोप लगता है की महिलाओं ने इस से नाता तोड़ लिया लिया है , जबकि ऐसा है नहीं अच्छी फिल्मे आती है तो महिलाएं अवश्य फिल्मे देखती है . कईसन पियवा के चरित्तर बा को महिलाएं पसंद कर रही है इसका मतलब फिल्म अच्छी बनी है . खैर , यह सब आपलोगों का ही प्यार है . मैं अभी जिस फिल्म की शूटिंग कर रहा हूँ यह फिल्म भी काफी अच्छी बन रही है , इसकी चर्चा मैं आपलोगों से अगले शनिवार को करूँगा . आप मेरा यह स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में हर शनिवार पढ़ सकते हैं. . अगले सप्ताह फिर आपसे मुलाकात होगी .. जय माता दी
आपका रवि किशन

Friday, 20 January 2012

जय हो भोजपुरिया समाज

आप सभी को आपके अपने रवि किशन का प्रणाम . अभी मैं सिलवासा में दयाल निहलानी जी की पहली भोजपुरी फिल्म की शूटिंग कर रहा हूँ , इस बारे में आगे चर्चा करूँगा क्योंकि अभी अभी मुझे एक दुखद समाचार मिला है , प्रसिद्द फिल्म समीक्षक निकहत काजमी जी का आज (शुक्रवार) सुबह देहावसान हो गया . देश के सबसे बड़े अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया के साथ वो पिछले २४ साल से जुडी थी. मात्र एक सप्ताह पहले मैंने उनसे बात की थी और मैंने उन्हें धन्यवाद दिया था क्योंकि उन्होंने पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई मेरी फिल्म चालीस चौरासी की समीक्षा की थी . भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे, फिल्म इंडसट्रीज के लिए यह अपूरणीय क्षति है . यहाँ सिलवासा में जब मैंने यह खबर यूनिट के लोगो को दी तो वो भी दुःख में डूब गए . जिन्हें भी उनसे मिलने का अवसर प्राप्त हुआ था उनके सामने स्वर्गीय निकहत जी का मुस्कुराता चेहरा सामने आ गया. खैर , यह तो संसार का नियम है , एक ना एक दिन हम सभी को जाना है , हाँ एक कसक दिल में रहती है अपनों के जाने की . मैं आपलोगों के लिए अपना ये स्तम्भ शुक्रवार को लिखता हूँ और पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई मेरी तीनो फिल्मे आज दुसरे सप्ताह में पहुच गयी है , मैं आप लोगों का शुक्रिया अदा करता हूँ की तीनो फिल्मो को आपने प्यार दिया . हिंदी फिल्म चालीस चौरासी ने पहले सप्ताह में ही अपने लागत के करीब पहुच गयी है , मतलब पैसा वसूल और अगली फिल्म की तैयारी. बिहार में रिलीज़ हुई मेरी फिल्म केहू हमसे जीत ना पाई अपने सभी रिलीजिंग सेंटर में दुसरे सप्ताह में पहुच गयी है . फिल्म के वितरक पुनीत ने मुझे बताया है की सिनेमाघरों में दो सप्ताह पूरा करने के बाद फिल्म की आधी से भी कहीं अधिक लागत बिहार से ही पूरी हो जाएगी , उत्तर प्रदेश में भी फिल्म ने अच्छा कारोबार किया है और अगले सप्ताह यह फिल्म मुंबई में आप लोगो के सामने होगी . मुंबई में तो आप लोग मेरी फिल्म को हाथो हाथ उठा लेते हैं इसीलिए यहाँ का व्यवसाय अच्छा होना तय है . मैं फिल्म के निर्माता डॉ. विजाहत करीम और निर्देशक एम.आई.राज और अपने सहयोगी कलाकारों को उनकी फिल्म की सफलता के लिए बधाई देता हूँ . पिछला सप्ताह पूरे भोजपुरी समाज के लिए एक खुशखबरी लेकर आया था क्योंकि उनकी भाषा की कोई पहली फिल्म संतान - एगो तोहफा विदेश में रिलीज़ हुई वो भी नियमित शो में. यह फिल्म अगले महीने मुंबई में लगेगी . इस फिल्म को भी प्रदीप भैया और उनकी टीम रिलीज़ कर रही है जो आज की तारीख में मुंबई में भोजपुरी फिल्म के निर्माताओं के लिए अच्छे वितरको में से एक माने जाते हैं . संतान एक बहुत ही अच्छी पारिवारिक फिल्म है और ऐसी फिल्म है जिसे आप अपने परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं. अंत में मैं दयाल निहलानी जी की पहली भोजपुरी फिल्म का जिक्र करना चाहूँगा . दयाल जी हिंदी फिल्मो के जाने माने निर्देशक है उन्होंने अंधायुद्ध , गेम्बलर और करमयोद्धा जैसी काफी अच्छी फिल्मे बनायी है अब पहली बार भोजपुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं , दयाल जी श्याम बेनेगल सर के साथ बरसो से जुड़े हैं और मैंने भी श्याम सर के साथ दो फिल्मे वेलकम तो सज्जनपुर और वेल्डन अब्बा किया है इसीलिए दयाल जी से मेरा पुराना सम्बन्ध रहा है . मैं उनके भोजपुरी आगमन पर उन्हें बधाई देता हूँ और उन जैसे लोगो के भोजपुरी में आने से भोजपुरी फिल्मो का स्तर काफी उंचा उठ जायेगा . आप मेरा ये स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी हर रविवार पढ़ .सकते हैं . अगले सप्ताह फिर आपसे बात होगी .
आपका अपना
रवि किशन

Saturday, 14 January 2012

बहुत ही सुखद है ये एहसास


आप सभी को आपके अपने रविकिशन शुक्ल का प्रणाम . अभी अभी पटना से लौटा हूँ और आपसे रु ब रु हो रहा हूँ . मैं कल रिलीज़ हुई अपनी फिल्म चालीस चौरासी के प्रोमोशन के लिए नसीर साहब, अतुल और अपने निर्देशक ह्रदय शेट्टी के साथ वहाँ गया था. इस बारे में मैं आपसे थोड़ी देर बाद चर्चा करूँगा , सबसे पहले आप सभी को मकर संक्रांति की ढेरो बधाई. कल मकर संक्रांति का त्यौहार है . आज ही से त्योहारों का सिलसिला शुरू हो रहा है. आप लोगों को तो पता ही है की १४ दिसम्बर से १४ जनवरी का समय खरमास के नाम से जाना जाता है और अपने यू पी बिहार में इस दौरान किसी भी अच्छे काम को नहीं किया जाता है . मकर संक्रान्ति से अच्छे दिनों की शुरुआत होती है . मुंबई में तिल गूळ ध्या आणि गोड़ गोड़ बोला कहकर हम एक दुसरे को इस त्योहार की बधाई देते हैं . आपको जानकार आश्चर्य होगा की मकर संक्रांति का त्यौहार देश के कोने कोने में अलग अलग नाम से मनाया जाता है और किसी अन्य त्योहार के इतने रूप नहीं होते जितने की इस त्योहार का होता है. हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है . इस दिन अंधेरा होते ही आग जलाकर अग्नि पूजा करते हुए तिल,गुड़, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति दी जाती है, बंगाल में इस पर्व पर स्नान पश्चात तिल दान करने की प्रथा है, तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं तो असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं. राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं. इस त्यौहार पर आपसी भाई चारा और भी मजबूत हो जाता है . मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ की ये भाई चारा कायम रहे. खैर मैं बात कर रहा था आज के अपने ख़ास दिन के बारे में . अपने बीस साल के फिल्मी कैरियर में ऐसा पहली बार हुआ है जब तीन अलग अलग फिल्मो के माध्यम से देश के कोने कोने के हर शहर और कसबे के सिनेमा घरो तक मैं पहुच गया हूँ. कल मेरी तीन फिल्मे रिलीज हुई है दो भोजपुरी की और एक हिंदी की . सबसे पहले मैं भोजपुरी की चर्चा करूँगा क्योंकि मेरे दिल के करीब यही सबसे ज्यादा है. मुंबई में मेरी फिल्म मल्लयुद्ध लगभग तीस सिनेमाघरों में रिलीज हुई है और मुझे पता चला है की आपलोगों ने हमेशा की तरह मेरी हर फिल्मो जैसा प्यार इस फिल्म को दिया है . जैसा की मैं आपलोगों को ऊपर बता चुका हूँ की मैं पटना आया हुआ था अपनी फिल्म चालीस चैरासी की पूरी टीम के साथ . पटना के लोगो ने हमेशा मुझे अपना प्यार और आशीर्वाद दिया है. लेकिन कल जिस तरह से पटना एअरपोर्ट पर स्वागत हुआ उससे अभिभूत हो गया या यू कहे की उनका और बड़ा कर्ज मुझपर चढ़ गया तो कोई गलत नहीं होगा. पटना को हमेशा से मैंने अपना ही घर माना है और यहाँ आना मतलब अपने घर आने जैसा ही है . लेकिन इस बार लोगो का स्नेह मेरे प्रति कुछ ज्यादा ही दिख रहा था . यही नहीं बिहार के कोने कोने में आज रिलीज हुई मेरी फिल्म चल रही है और चालीस चौरासी के साथ साथ रिलीज हुई मेरी दूसरी फिल्म केहू हमसे जीत ना पाई को भी अच्छी शुरुवात मिली है. साल के शुरुवात में रिलीज हुई मेरी तीनो फिल्मो को आप लोगो ने इतना प्यार दिया उससे मैं अभिभूत हूँ . मिडिया ने भी पिछले १५ दिनों से हमें काफी पब्लिसिटी दिया है , यही नहीं चालीस चैरासी फिल्म की समीक्षा में भी फिल्म और हमारे अभिनय की तारिफ की है . सच पूछिए तो इससे मनोबल बढ़ता है . वैसे इस साल कई अच्छी फिल्मो में आप मुझे देख सकते हैं और हर फिल्म में अंदाज अलग अलग है. आप मेरा ये स्तम्भ आप कल हमारा महानगर में भी पढ़ सकते हैं .
आपका
रवि किशन

Saturday, 7 January 2012

चालीस चौरासी का जोरदार प्रोमोशन


आप सभी को आपके अपने रवि किशन का प्रणाम. पिछले रविवार को मैं हिमालय की सर्द वादियों से आपसे अपने मन की बात बयान किया था , अब छुट्टी समाप्त हो गयी है और फिर से अपने रूटीन में लग गया हूँ . फिलहाल दो दिनों तक दिल्ली में बिताने के बाद कल मुंबई आया हूँ और अभी इंदौर जा रहा हूँ. १३ जनवरी को रिलीज़ हो रही फिल्म चालीस चौरासी के प्रोमोशन के लिए . मेरे साथ नसीर साहब , फिल्म के निर्देशक ह्रदय शेट्टी भी हैं. मेरे बीस साल के फ़िल्मी कैरियर में ऐसा पहली बार हुआ है जब लगातार आठ दिनों तक किसी फिल्म के प्रोमोशन में रहने और अपने दर्शको से सीधा संवाद करने का मौका मिला है . वैसे भोजपुरी फिल्मो के प्रोमोशन के लिए अक्सर पटना और बनारस जाने का मौका मिलता रहता है लेकिन वो प्रोमोशन एक से दो दिन का होता है . खैर इस बारे में आगे आपसे चर्चा करूँगा फिलहाल अपने परिवार के साथ बिताये पल आप से ज़रूर बांटना चाहूँगा . पिछले सप्ताह मैंने इस अद्भुत पल का जिक्र किया था , दरअसल काम में व्यस्तता के कारण परिवार को समय देना थोडा मुश्किल हो जाता है , लगातार मुंबई से बाहर शूटिंग करने के कारण इतना समय नहीं मिलता है की अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कुल समय बीता सकूँ , उनकी भावनाओ को जान सकूँ . इसीलिए साल के आखिरी कुछ दिनों को मैंने खुद को अपने परिवार के हवाले कर दिया और छुट्टी बिताने के लिए जगह चुना शिमला, मनाली जैसे बर्फीली वादियों को . कडाके के ठंढ के बीच पांच दिन का ये वक़्त कैसे बीत गया , पता ही नहीं चला .बुधवार को हमें वापस लौटना था , लम्बे सड़क मार्ग से सफ़र तय कर चंडीगढ़ पंहुचा तो कोहरे के कारण हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था, यहाँ पहुच कर पता चला की की कोई भी जहाज मुंबई के लिए नहीं जा पायेगी क्योंकि कोहरे के कारण कुछ भी दिख नहीं रहा था , मुझे मुंबई वापस आकर अगले दिन दिल्ली आना था चालीस चौरासी के प्रोमोशन के लिए . खैर मुंबई आने का इरादा त्याग कर सड़क मार्ग से दिल्ली आया . सफ़र बहुत उबाऊ था क्योंकि गाडी चल नहीं रेंग रही थी . मैंने भी अपने ड्राइवर को कहा की कोई जल्दी नहीं है . गुरूवार और शुक्रवार को दिन भर कई ठिकानो पर आम दर्शको के मिलकर काफी सुखद एहसास हुआ , शुक्रवार को दिल्ली से वापस लौटने के बाद शनिवार को पूना गया , दोनों ही जगह आम दर्शको और मिडिया का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला , हम पूना से शाम वापस आ गए क्योंकि मुझे मुंबई पुलिस द्वारा हर साल आयोजित किये जाने वाले स्टार नाईट उमंग में मौजूद रहना था. आज चालीस चौरासी की पूरी टीम को पहले पटना फिर इंदौर जाना था लेकिन किसी कारण बस पटना का कार्यक्रम पांच दिनों के लिए ताल गया है. इन प्रोमोशन के दौरान हमने महसूस किया की हम सफलता के पथ पर आगे बढ़ते हैं और उन्हें ही समय नहीं देते जिन्होंने हमें इस काबिल बनाया . आप समझ ही गए होंगे की मैं आप लोगो की बात कर रहा हूँ जो हमें देखने के लिए टिकट निकाल कर सिनेमा हॉल में जाते हैं , मुंबई के हमारे दर्शक तो हम सभी सितारों को यदा कदा नज़र आ भी जाते हैं लेकिन दूर दराज़ के लोग इससे बंचित रह जाते हैं . भोजपुरी फिल्मो में तो जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की परंपरा नहीं रही है , लेकिन हिंदी फिल्म जगत वाले महानगरो में इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं , लेकिन मैं तारिफ करना चाहूँगा चालीस चौरासी के निर्देशक ह्रदय शेट्टी का जिन्होंने महानगरो के साथ साथ उन शहरो में भी फिल्म का प्रोमोशन करने का फैसला किया जहाँ कभी कभार ही फ़िल्मी कलाकार किसी फिल्म के प्रोमोशन के लिए जाते हैं . ह्रदय ने आठ दिन के प्रोमोशन में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, इंदौर , पटना , पुणे , अहमदाबाद जैसे शहरों को चुना है .
. प्रोमोशन का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की गयी है , प्रोमोशन के आखिरी दिन मुंबई में गुरूवार को फिल्म का प्रीमियर है . मुझे ख़ुशी है की एक अच्छी फिल्म को हम आम लोगो तक सीधा पहुचाने की दिशा में सार्थक कदम उठा रहे हैं. इस प्रोमोशन का हिस्सा बनकर मुझे लगा की अगर भोजपुरी फिल्मो का प्रोमोशन भी कुछ इसी तरह हो तो निर्माता को काफी फायदा होता है . मैं इस दिशा में आगे बढ़ रहा हूँ और फरबरी में रिलीज़ हो रही अपनी भोजपुरी फिल्म कईसन पियवा के चरित्तर बा को ढंग से प्रमोट करूँगा . मैं भोजपुरी फिल्मो के निर्माता निर्देशकों से भी अपील करता हूँ की वो इस बारे में सोचे ताकि इसका फायदा फिल्म को हो. अंत में मैं आप लोगो से गुजारिश करूँगा की चालीस चौरासी अवश्य देखें , फिल्म देखकर आपको लगेगा की आपका पैसा वसूल हो गया है, क्योंकि इंटरटेनमेंट का भरपूर मसाला है इस फिल्म में . हम चारो की केमेस्ट्री काफी अच्छी है जिसे देखकर आप कह उठेंगे - बहुत ही प्यार से बनी है ये फिल्म . आप मेरा ये स्तम्भ आप हर रविवार मुंबई और पुणे से प्रकाशित लोकप्रिय हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी पढ़ सकते हैं अगले हफ्ते फिर मुलाकात होगी . तब तक के लिए आपसे विदा चाहता हूँ .
आपका अपना
रवि किशन

Saturday, 31 December 2011

अलविदा २०११, स्वागतम २०१२


आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . सबसे पहले आप सभी को नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं . साल के पहले दिन की शुरुवात रविवार यानी छुट्टी के दिन से हो रही है और मेरे लिए ख़ुशी की बात यह है की पहले दिन ही आपसे रूबरू हो रहा हूँ . अभी हिमालय की सर्द वादियों में अपने पूरे परिवार के साथ छुट्टी मना रहा हूँ , लम्बे अंतराल के बाद कुछ वक्त मिला था सोचा इसका सदुपयोग कर लिया जाये क्योंकि दो दिन बाद से एक बार फिर काम में जुट जाना है .फिर महीनों तक आराम का वक़्त नहीं मिलने वाला है . आज मेरे बड़े भाई सामान श्री आर.एन.सिंह जी का जन्मदिन भी है , मेरी तरफ से उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी बधाई ,
आज साल का पहला दिन है मतलब खुशियों का दिन लेकिन बीते साल की कुछ खट्टी मीठी यादें भी है . मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर बीता साल काफी अच्छा रहा है क्योंकि इस दौरान कई बड़ी फिल्मो की शूटिंग मैंने पूरी की . अंतिम शूटिंग मेरी थी साल के आखिरी सप्ताह में डेंजरस इश्क की जिसे बना रहे हैं विक्रम भट्ट और एक खासियत इस फिल्म की ये भी है की इस फिल्म से करिश्मा कपूर की वापसी हो रही है . फिल्म के बारे में ज्यादा चर्चा फिलहाल नहीं करूँगा बस इतना ही कहूँगा की एक अद्भुत प्रेम कहानी आपको इस फिल्म में मिलेगी मेरे और करिश्मा कपूर के बीच की . वैसे नए साल में मेरी कई फिल्मे आ रही है . लेकिन पहली फिल्म एक मजेदार फिल्म है जो मकर संक्रांति पर आ रही है , जिसकी आजकल काफी चर्चा है . आप समझ ही गए होंगे मैं चालीस चैरासी की बात कर रहा हूँ. इस फिल्म को निर्देशित किया है ह्रदय शेट्टी ने और मैं इस फिल्म में नसीर सर , के.के. मेनन और अतुल कुलकर्णी के साथ नजर आऊंगा . मैं अपने मूह से खुद इस फिल्म की तारिफ नहीं करूँगा वो मैं आप लोगो पर छोड़ देता हूँ लेकिन मैं नसीर सर की तारिफ अवश्य करूँगा क्योंकि वो अभिनय के अथाह सागर हैं नसीर सर अपने आप में एक संस्थान की तरह हैं. उनके पास अभिनय का दो दशकों से भी अधिक समय का अनुभव है और उनके इस अनुभव से मैंने काफी कुछ सीखा है. मैं पूरी तरह उनके प्रभाव में हूं, क्योंकि वो बहुत ही ईमानदार, भद्र और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं. उनके जीवन में पैसा मायने नहीं रखता. सच में मुझे उनके साथ काम करते बड़ा मजा आया. के.के और अतुल भी बहुत अच्छे अभिनेता है और हम चारो की जुगल बंदी आपको रोमांच से भर देगी . खैर , इस फिल्म की चर्चा आगे करूँगा फिलहाल इस का प्रोमोशन जम कर चल रहा है . सबसे दिलचस्प बात तो यह है की बरसो पहले जिस गाने ( हवा हवा अई हवा खुशबू लूटा दे ) की धूम मची थी उसका आनंद आप इस फिल्म में भी उठा सकते हैं .
बीते साल हमने कला क्षेत्र के कई विभूतियों को खोया है पंडित भीम सेन जोशी, भूपेन हजारिका , शम्मी कपूर , देव आनंद साहब जैसे कुछ ऐसे नाम हैं जिहोने भारतीय कला क्षेत्र को नया आयाम दिया . उन सभी को मेरी भावभीनी श्रधांजलि . अगले रविवार फिर आपसे मुलाकात होगी . आप मेरा ये स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी हर रविवार पढ़ सकते हैं .. आपका नया साल शुभ हो , आप लोगो की सारी मनोकामनाएं पूरी हो इसी आशा के साथ आपसे विदा चाहता हूँ .
आपका
रवि किशन

Sunday, 25 December 2011

जय भोजपुरी : जय भोजपुरिया



आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . सबसे पहले आप सभी को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाये : आने वाला साल आप सभी के जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लाये , यही प्रार्थना है मेरी भगवान से . बीता साल जो अब चंद दिनों का मेहमान है , को विदाई देते हुए हर किसी को अपना आकलन करना चाहिए की मैंने क्या खोया , क्या पाया, क्या पाया जा सकता था जो मैंने नहीं पाया आदि आदि. यानी बीता साल हर किसी के लिए महत्वपूर्ण होता है . मेरे लिए भी बीता साल काफी महत्वपूर्ण रहा है . सच कहूँ तो मेरे कैरियर के अच्छे साल में से एक है साल 2011 . बचपन में मेरी नन्ही आँखों ने एक सपना देखा था , की कुछ ऐसा करूँ की सारी दुनिया मुझे पहचाने , मुझे जाने और मेरे माता पिता , गुरुजनों को मुझपर गर्व हों और इसे पाने के लिए मेरे नज़र में तीन ही ऑप्शन थे क्रिकेट , राजनीति और फिल्म . मैंने खुद को टटोला तो पाया की अभिनय तो मेरे शरीर का एक हिस्सा है. फिल्मो का शौक था , फिल्म देखकर सोचता था मैं कब परदे पर आऊंगा ? मुंबई आया संघर्ष किया वो भी ऐसा संघर्ष जिसे करना आसान नहीं था . हमारे संघर्ष के दौर में मनोरंजन क्षेत्र में काम पाने के इतने माध्यम नहीं थे और मुझ जैसे बिना किसी गॉड फादर के यहाँ जगह बनाना मुश्किल था . मैंने हिम्मत नहीं हारी और मेरा साथ दिया मेरी भाषा भोजपुरी ने . आज मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है की आज हिंदी फिल्म जगत के बड़े बड़े निर्माता निर्देशक अगर मुझे अपनी फिल्मो में काम दे रहे हैं तो उसकी एक वजह भोजपुरी भी है . आप सोच रहे होंगे आखिर मैं अपनी संघर्ष गाथा क्यों बता रहा हूँ , दरअसल बीते साल में हिंदी फिल्म जगत ने मुझे काफी इज्ज़त प्रदान की . आप लोगो को पता ही है की मैं पिछले कई सप्ताह से हिंदी फिल्मो की शूटिंग में व्यस्त हूँ. सैफ अली खान की होम प्रोडक्शन एजेंट विनोद की शूटिंग के बाद जिला गाज़ियाबाद, फिर इसक और विक्रम भट्ट साहब की डेंजरस इश्क की शूटिंग में व्यस्त रहा . भोजपुरी की कई फिल्मे मेरे पास आई लेकिन व्यस्तता के कारण मैंने उसे आगे कर दिया . आप लोगो को लग रहा होगा की मैंने भोजपुरी फिल्मो से किनारा कर लिया है , लेकिन ऐसा है नहीं , मैं कभी भी भोजपुरी फिल्मो से अपना नाता नहीं तोड़ सकता , क्योंकि आपके प्यार ने ही आज मुझे हिंदी के बड़े बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका दिया है. एक ऐसी ही फिल्म है चालीस चौरासी जो मकर संक्रांति के अवसर पर १३ जनवरी को रिलीज़ हो रही है . इस फिल्म में आप अपने भोजपुरिया रवि किशन को बिल्कुल अलग अंदाज़ में देखेंगे . चालीस चौरासी को निर्देशित किया है मेरे दोस्त ह्रदय शेट्टी ने . फिल्म में नसीरुद्दीन सर , के.के.मेनन और अतुल कुलकर्णी मेरे साथ हैं. ह्रदय जी ने एक अच्छी फिल्म बनायीं है , मुझे पूरा भरोसा है की आपलोगों को ये फिल्म अवश्य पसंद आएगी . नए साल की शुरुवात फिर से भोजपुरी फिल्मो की शूटिंग से कर रहा हूँ . लगभग आधा दर्ज़न फिल्मो की शूटिंग अगले चार महीनो में मुझे पूरी करनी है . खैर , नए साल के पहले दिन यानी अगले सप्ताह मैं जब आप मेरा स्तम्भ पढ़ रहे होंगे तब मैं शिमला और मनाली की ठंढी का आनंद ले रहा होऊंगा , काफी समय से परिवार से थोडा कटा रहा हूँ इसीलिए पत्नी और बच्चों के साथ छुट्टी मनाने जा रहा हूँ . परिवार का साथ हो तो काम का बोझ समाप्त हो जाता है . अगले सप्ताह फिर आपसे मुलाकात होगी . आप मेरा ये स्तम्भ मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर में भी हर रवि वार पढ़ सकते हैं . नए साल के पहले दिन आपसे फिर बात होगी
आपका रवि किशन

Saturday, 3 December 2011

भोजपुरिया माटी के लाल राजेन्द्र बाबु


आप सभी को आपके अपने रवि किशन शुक्ल का प्रणाम . फिलहाल जोधपुर की ठंढी के बीच विक्रम भट्ट साहब की फिल्म डेंजरस इश्क की शूटिंग में व्यस्त हूँ और यही से अपने दिल की बात आपसे बयान कर रहा हूँ.आज का दिन ना सिर्फ देश के लिए बल्कि हम भोजपुरी फिल्म जगत वालों के लिए भी ख़ास है क्योंकि इस दिन देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती है . बिहार के सिवान के जीरादेई गाँव में एक मध्यम वर्ग के परिवार में जन्म लेने वाले राजेंद्र बाबु मेरी नज़र में भोजपुरी क्षेत्र के सबसे प्रकांड विद्वान् थे . मैंने पढ़ा था बचपन में उनके बारे में की कोलकाता के जिस प्रेसिडेंसी कोलेज में वो पढ़ते थे वहाँ के शिक्षक भी उन्हें खुद से ज्यादा काबिल समझते थे . सादा जीवन उच्च विचार के प्रतिमूर्ति राजेंद्र बाबू के बारे में उनकी परीक्षा पुस्तिका की जांच करने वाले शिक्षक ने लिखा था की छात्र शिक्षक से कहीं जायदा जानकार है. यहाँ इस बात का जिक्र करने का मेरा मकसद यह है की हमारी धरती ने एक से बढ़कर एक माटी के लाल को जन्म दिया है जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में अपने कार्यों से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. बात राजेन्द्र बाबु की कर रहा हूँ तो शायद कम लोगो को ही पता होगा की जिस भोजपुरी फिल्म जगत में लाखो लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम कर अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं इसकी शुरुवात राजेन्द्र बाबु ने ही करवाई थी. राजेन्द्र बाबु का भोजपुरी भाषा के प्रति प्रेम जग जाहिर है . उस दौर में भोजपुरी फिल्मे बनती नहीं थी . भोजपुरी फिल्मो के पहली फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ थी और इस फिल्म की कहानी तैयार की थी भोजपुरी फिल्मो के भीष्म पितामह कहे जाने वाले नाजीर हुसैन साहब ने. नाजिर साहब भोजपुरी भाषा में फिल्म बनाने को आतुर थे और उन्हें इसकी प्रेरणा मिली थी राजेंद्र बाबु से . राजेंद्र बाबु ने उस समय उन्हें कहा था की अगर संयम और हिम्मत है तो आगे बढ़ो हम आपके साथ है. सबसे दिलचस्प बात तो ये है की इस फिल्म के निर्माण का बीड़ा उठाने वाले विश्व नाथ प्रसाद शाहाबादी को नाजीर हुसैन से मिलवाया भी था राजेंद्र बाबु ने ही . १६ फरवरी १९६१ को खुद राजेन्द्र बाबु ने ही पहली फिल्म का मुहूर्त पटना के शहीद स्मारक के पास किया था. अब आप लोगो को पता चल ही गया होगा की आज जिस फिल्म जगत की बदौलत हम अपना नाम रोशन कर रहे हैं वो राजेंद्र बाबु की ही देन है. आज भले ही फिल्म जगत में इसकी कोई चर्चा नहीं होती हो लेकिन हमें भोजपुरिया माटी के लाल राजेंद्र बाबु के इस देन पर गौरवान्वित होना चाहिए . चलते चलते मैं आपसे पिछले दिनों की एक अद्भुत संस्मरण से आपको अवगत कराना चाहता हूँ. मेरी बड़ी चाहत थी की मैं अजमेर शरीफ जाकर ख्वाजा के दरबार में चादर चढाऊं , भले ही मैं ब्रह्मण का बेटा हूँ और महादेव का भक्त लेकिन मेरी आस्था सभी धर्मो में है क्योंकि सभी धर्म प्यार और भाईचारा सिखाता है. जोधपुर में शूटिंग करने के कारण वहाँ जाने की मेरी इच्छा पूरी हो गयी . मैंने चादर चढ़ा कर कई घंटे वहाँ बिताये , काफी सुकून महसूस किया. मुझे कुछ वैसी ही अनुभूति मिली जैसा की किसी मंदिर में जाकर मिलती है. मैं ब्राह्मण का बेटा हूँ, महादेव का परम भक्त हूँ लेकिन सभी धर्मो में मेरी अपार श्रधा और आस्था है क्योंकि सभी धर्मो का सार है प्यार और भाई चारा और वैसे भी मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना . चलते चलते मैं मुंबई के अपने मिडिया से जुड़े भाई बहनों से माफ़ी चाहता हूँ की मैं अपनी फिल्म चालीस चौरासी के फर्स्ट लुक के मौके पर उनके समक्ष मौजूद नहीं था. आप मेरा ये ब्लॉग मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक हमारा महानगर के रविवार के विशेषांक में भी पढ़ सकते हैं. अगले सप्ताह फिर मुलाकात होगी
आपका
रवि किशन